Market Update

Monday, 28 November 2016

Best Advisory Company Update These Brokerage Firms Downgraded The Target

ब्रोकरेज हाउस ने इन कंपनियों के घटाए टार्गेट, नोट बंदी का पड़ा असर

Best Advisory Company | Equity Market Tips

नोट बंदी से डिमांड में गिरावट का असर कंपनियों की तीसरे क्वार्टर की आय पर देखने को मिलता तय माना जा रहा है। हालांकि कई एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ग्रोथ अगले साल के पहले क्वार्टर से ही देखने को मिलेगी। ऐसे में ब्रोकिंग फर्म ने कई कंपनियों की सेल्स और प्रॉफिट के अनुमानों में कटौती की है।
नोट बंदी से रियल्टी, ऑटो सेक्टर पर दबाव संभव 
सरकार के द्वारा बड़े नोट की बंदी से रियल्टी सेक्टर और ऑटो सेक्टर पर दबाव बढ़ने की आशंका है। वहीं इन सेक्टर के जुड़े दूसरे सब सेग्मेंट की कंपनियों की आय में भी गिरावट आने की आशंका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन सेक्टर में कैश ट्रांजेक्शन की संख्या ज्यादा थी ऐसे में मांग घट गई है। वहीं लोगों ने गैर जरूरी खर्चे आगे के लिए टाल दिए हैं। जिससे पूरे साल के लिए सेल्स और प्रॉफिट के अनुमानों में कटौती की गई है।

एस्कॉर्ट्स (अक्टूबर से मार्च ट्रैक्टर सेल्स वॉल्यूम अनुमान 21 फीसदी घटा)
ब्रोकिंग फर्म जियोजित बीएनपी पारिबा ने नोट बंदी के फैसले की वजह से एस्कॉर्ट्स की आय पर आशंका पड़ने की आशंका जताई है। ब्रोकिंग फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की आय में 80 फीसदी हिस्सा ट्रैक्टर सेग्मेंट से आता रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के फैसले से सिस्टम में नकदी की सप्लाई में तेज गिरावट देखने को मिली है। जिसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाको में देखने को मिला है। पहले 6 महीने में ट्रैक्टर सेल्स में 22 फीसदी की ग्रोथ की वजह से आय में 16 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली थी। हालांकि नोट बंदी के बाद से तीसरे और चौथे क्वार्टर के दौरान कंपनी की ट्रैक्टर और इक्विपमेंट वॉल्यूम सेल्स में 21 से 16 फीसदी की गिरावट का अनुमान दिया है। हालांकि मध्यम अवधि में रिकवरी की उम्मीद के साथ ब्रोकिंग फर्म ने 345 के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह दी है।

हैवेल्स इंडिया ( साल 2016-17 का आय अनुमान 7% घटाया)
ब्रोकिंग फर्म जियोजित बीएनपी पारिबा ने नोटबंदी के फैसले के बाद से हैवेल्स इंडिया की साल 2016-17 के आय अनुमान में 7 फीसदी की कटौती की है। वहीं, 2017-18 के लिए आय अनुमान को 8 फीसदी घटा दिया है। ब्रोकिंग फर्म के मुताबिक कैश में कमी के बाद ग्राहक खर्च में कटौती कर सकते हैं, जिसका असर कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर देखने को मिलेगा। वहीं रियल्टी सेक्टर के लिए सेंटीमेंट्स काफी निगेटिव हो गए हैं। घरों की बिक्री में कमी का भी कंपनी की आय पर असर पड़ने की आशंका है। ब्रोकिंग फर्म के मुताबिक कंपनी का मुख्य फोकस स्विचगियर, केबल्स और वायर सेग्मेंट पर है। ये कंपनी की कुल सेल्स का 64 फीसदी हिस्सा है। रियल्टी सेक्टर में सुस्ती आने से स्विचगियर और वायर सेग्मेंट की बिक्री पर असर पड़ सकता है। हालांकि लंबी अवधि में ग्रोथ की उम्मीद और स्टॉक के बेहतर वैल्यूएशन की वजह से ब्रोकिंग फर्म ने स्टॉक में 388 के लक्ष्य के साथ लंबी अवधि के की सलाह दी है।

जी एंटरटेनमेंट ( एड रेवेन्यू पर पड़ सकता है असर)
आईसीआईसीआई डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी के बाद मांग में कमी की आशंका से छोटी अवधि में कंपनियां लागत कम करने की कोशिश कर रही हैं। इससे एड पर खर्च कम किया जा सकता है। ब्रोकिंग फर्म ने तीसरे और चौथे क्वार्टर के दौरान प्रमोशन पर खर्च घटने से कंपनी की पूरे साल के लिए एड ग्रोथ का अनुमान घटा कर 10.3 फीसदी कर दिया है। पहले 14.9 की ग्रोथ का अनुमान था। ब्रोकिंग फर्म ने इसके साथ ही कंपनी का लक्ष्य 583 से घटाकर 530 किया है।

एशियन पेंट्स
जियोजित बीएनपी पारिबा की रिपोर्ट के मुताबिक फेस्टिवल से शुरू हुई डिमांड पर कैश क्राइसिस का असर देखने को मिल सकता है। ब्रोकिंग फर्म के मुताबिक रियल्टी सेक्टर पर असर से दूसरी छमाही में कंपनी की आय पर दबाव रहेगा। आय घटने के संकेतों के बाद ब्रोकिंग फर्म ने पूरे साल के लिए कंपनी के प्रॉफिट अनुमान में 2 फीसदी की कटौती की है। हालांकि ब्रोकिंग फर्म ने 1108 के लक्ष्य के साथ निवेश की सलाह बनाए रखी है।
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